Thursday, September 17, 2009

माँ क्यों उपेक्षित


नवम्बर 08-फरवरी 09 ------- बुन्देलखण्ड विशेष
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अलग कोना
रूपाली दास ‘तिस्ता’


विवाह का सुन्दर सपना लिया एक औरत मायके से ससुराल आती है लेकिन वह गृहस्थी की चाकी में पिस कर रह जाती है। घर, पति और बच्चों के लिए खुद को उत्सर्ग करने वाली औरत की अपनी जिन्दगी नहीं होती। अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय वह अपनी गृहस्थी संभालने, बच्चों को आगे बढा़ने, उनकी पढ़ाई तथा उनके भविष्य की चिंता में लगा देती है। जब उसके जीवन की मंझधार उम्र में बहुत बड़े परिवर्तन होते हैं; उस पर शारीरिक एवं मानसिक बदलाव आता है; अकेलेपन की अनुभूति, असुरक्षा का भय, पारिवारिक जिम्मेवारियों का बढ़ना, भावनात्मक सम्बन्धों में बदलाव, मानसिक स्थिरता आदि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शारीरिक परिवर्तन उसकी शारीरिक-शक्तिहीनता को दर्शाते हैं जो औरत की मानसिक और भावनात्मक ताकत को कमजोर तथा अस्थिर बनाते हैं। पति और बच्चों की अत्यधिक व्यस्तता के कारण वह अकेली होती चली जाती है, यह अकेलापन उसमें असुरक्षा का भाव पैदा करता है। उम्र के इस पड़ाव पर उसके सामने कुछ संघर्ष, कुछ उलझनें, कुछ प्रश्न एक चुनौती पैदा करते हैं, जिनका उसे सामना करना पड़ता है। ऐसे में उसका साथी होता है मात्र उसका आत्मबल और आंतरिक ऊर्जा।
उम्र के इस पड़ाव पर उसे परिवार के प्यार, उसकी संवेदना की भरपूर दरकार होती है। जहाँ उसे पति के प्रेम नया जीवन दान देता है वहीं उसके बच्चों का प्यार, उनका सहृदय बर्ताव उसे जीने का सहारा देता है। बेटा-बहू, नाती-पोता यही उसका संसार होता है। यहाँ उसकी विडम्बना देखो कि यहाँ भी वह इस प्यार से वंचित रह जाती है।
मनुस्मृति कहती है कि मंत्र देने वाले दस गुरू के बराबर हैं एक आचार्य। शत आचार्यों के बराबर हैं एक पिता और हजार पिता के बराबर माता। माता का स्थान पृथ्वी में सर्वोपरि है फिर भी आज माँ क्यों उपेक्षित है। ‘माँ’ शब्द अपने आप में परिपूर्ण है, मधुर है। माँ का आँचल अत्यंत सुखद और शीतल है। दुःख हरने वाला शब्द ‘माँ’ अपने आप में ही संकटहारी है। माता अपने संतान को एक बीज से वृक्ष बनाती है। माँ के इन एहसानों का बदला संतान कभी चुका नहीं सकती फिर आज माँ क्यों उपेक्षित है? क्यों अपमानित है?
क्यों बेटा-बहू ये भूल जाते हैं कि ये दिन उनके लिए भी आयेगा जब उन्हें भी वृद्धावस्था में प्रवेश करना पड़ेगा। उन्हें भी इन सभी मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें भी वृद्ध माँ और पिता बनकर अपनी ही संतानों द्वारा उपेक्षित होना पड़ सकता है फिर भी यह समस्या बरकरार है और माँ आज भी उपेक्षित है।

खाद़ी पारा, हाउस शोभाकुंज
पोस्ट बोलपूर, जिला-वीरभूम
पश्चिम बंगाल पिन-731204

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